अंग्रेजो की लगातार दूसरी हार

इंग्लैंड सीरीज के पहले दो मैचो मे भारतीय टीम की जीत हुई है, किंतु जीतने के तरीके ने मुझे सबसे ज्यादा अचंभित किया है ।नब्बे के दशक से जो लोग भी भारतीय क्रिकेट को देख रहे है, उन्होने आज इंदौर मे हुए वनडे के जैसी शुरुवात के बाद भारतीय़ टीम कई बार हारते हुए देखा होगा,यदि सचिन ने अच्छी शुरुवात नही दे पाए तो भारतीम मध्यक्रम अक्सर दबाव नही झेल पाता था और टीम पराजित होती थी, किंतु सौरव गांगुली ने सन २००० मे जिस आक्रामकता और झुजारुपन के बीज बोए थे वो आज निश्चित रुप से धोनी की कप्तानी मे एक हरे - भरे पेड की शक्ल ले रहे है ।जहाँ एक ओर पहले मैच मे हमने अंग्रेजो को पहली गेंद से ही दबाव मे रख कर संभलने का मौका ही नही दिया वही दूसरी ओर दूसरे मैच मे जल्दी विकेट गिर जाने के बाद एक बडा स्कोर खडा किया और फिर गेंदबाजी के समय दो अच्छी साझेदारीयाँ होने के बाद भी हम मैच जीत पाने मे सफल रहे ।इन दोनो मैचो के हीरो थे युवराज सिंह जो कि टेस्ट टीम गांगुली की जगह लेने के प्रबल दावेदार नजर आ रहे है । इस सीरीज के पहले उनके फार्म पर सवाल उठ रहे थे , शायद इसलिये उनसे टीम की उप-कप्तानी भी वापस ले ली गई किंतु सही समय पर अपने फार्म को प्राप्त करके न केवल उन्होने अपने आलोचको का मुँह बंद कर दिया है बल्कि चयनकर्ताओ के दिमाग मे भी ये बात डाल दी है कि अब उन्हे टेस्ट टीम से अधिक दूर नही रखा जा सकता । उनसे सीरीज मे आगे भी इसी प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी ।

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