दिल्ली टेस्ट ड्रॉ , कुंबले का भार अब धोनी के मजबूत कंधो पर
तीसरा टेस्ट ड्रा हो गया, लक्ष्मण अपनी शानदार बल्लेबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच बने दोनो पारियो मे वो नाबाद ही रहे । पर इस टेस्ट मैच को कुंबले के आखरी टेस्ट मैच के रुप मे याद किया जाएगा । प्रदर्शन के लिहाज से अपनी स्वंय की और इस देश के करोडो क्रिकेट प्रेमी जनता की अपेक्षाओ का दबाव वो झेल नही पाए । पर ये सुखद अंत ही कहा जाएगा कि जिस मैदान पर नौ वर्ष पूर्व उन्होने एक करिश्मा किया था उसी मैदान पर उन्होने अपने करियर की आखरी गेंद डाली ।जंबो के नाम से मशहूर शांत किंतु झुजारू इस खिलाडी का कैरियर एक आदर्श कैरियर रहा है जिसमे शायद ही कभी कोइ विवाद हुआ हो । मैदान पर अपनी सटीक गेंदबाजी और लगातार मेहनत के बल पर ही वो छ: सौ से अधिक टेस्ट विकेट लेने मे कामयाब रहे वर्ना उनकी गेंदो वार्न और मुरली जैसा टर्न नही था । खेल के प्रति निष्ठा की जब भी बात होगी इस खिलाडी का नाम सबसे पहले लिया जाएगा जिसने टूटे हुए जबडे पर पट्टीयाँ बाँधकर न केवल गेंदबाजी की बल्कि एक एसे बल्लेबाज का विकेट भी लिया जो इस श्रृंखला के शुरूवात तक टेस्ट क्रिकेट मे रनो के शिखर पर बैठा था ।कुल मिलाकर भारतीय क्रिकेट ने एक एसे खिलाडी को खो दिया है जिसने अपनी गेंदबाजी से दुनिया भर के बल्लेबाजो पर भारतीय स्पिनर्स के दबदबे को बनाए रखा था और जिसे आगे जारी रखने के लिये अमित मिश्रा और पीयूष चावला जैसे स्पिनरो को काफी मेहनत करनी होगी ।
इसके साथ - साथ ये भी कहा जा सकता है कि कुंबले के संन्यास लेने के पश्चात भारतीय क्रिकेट मे धोनी युग की शुरुवात होगी जो कि पहले से ही एक दिवसीय और ट्वेंटी - २० मैचो मे भारत की कप्तानी कर रहे है ।
इसके साथ - साथ ये भी कहा जा सकता है कि कुंबले के संन्यास लेने के पश्चात भारतीय क्रिकेट मे धोनी युग की शुरुवात होगी जो कि पहले से ही एक दिवसीय और ट्वेंटी - २० मैचो मे भारत की कप्तानी कर रहे है ।
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