
इस एतिहासिक सीरीज के क्लाइमेक्स की शुरूवात हो चुकी है । भारतीय क्रिकेट के दो पीढीयो को अलग करती यह सीरीज कई एतिहासिक पलो की गवाह है, चाहे वह तेंदुलकर का लारा के रिकार्ड को पीछे छोडना हो,गांगुली के सात हजार टेस्ट रन हो,अनिल कुंबले और सौरव गांगुली की आखरी सीरीज होना हो ।सही मायनो मे ये सीरीज इस बात का निर्णय कर सकती है कि विश्व क्रिकेट मे आस्ट्रेलिया की नंबर एक पोजीशन कितनी सुरक्षित है ।पहले दिन के खेल की शुरुवात भारतीय टीम के लिये काफी अच्छी रही और कप्तान धोनी न टॉस जीत कर एक अच्छी पिच पर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और टेस्ट क्रिकेट मे अपना पहला मैच खेलने वाले सलामी बल्लेबाज विजय और सेहवाग ने शानदार शुरुवात की किंतु पहले विजय और फिर द्रविड और फिर सेहवाग के विकेट जल्दी-जल्दी गिर जाने की वजह से भारती मध्यक्रम पर दबाव आया, पर इस दबाव को शानदार ढंग से झेलते हुए लक्ष्मण और तेंदुलकर ने पारी को संभालकर एक मजबूत आधार प्रदान किया । यदि दिन के अंत मे तेंदुलकर और लक्ष्मण के विकेट न गिरे होते तो शायद भारत की स्थिती और मजबूत होती ।कुछ मिले जीवनदानो का फायदा उठाते हुए तेंदुलकर ने शतक तो बना लिया पर उसे वो एक और भी बडे स्कोर मे तब्दील नही कर पाए । एक बार फिर मैदान पर कल वही जोडी होगी जिसने मोहाली टेस्ट का रुख भारत की ओर मोडने मे एक अहम भूमिका निभाई थी, उनसे फिर एक बार उसी प्रदर्शन की आशा होगी ।
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